पहला ऑफिस वाला दिन…
जिसके बारे में हम स्कूल और कॉलेज के दिनों से सोचते आए हैं। जब सुबह उठकर यूनिफॉर्म की जगह फॉर्मल पहनना होता है, और बैग में किताबों की जगह एक छोटा-सा नोटपैड, एक पेन और ढेर सारी उम्मीदें रखनी होती हैं। यही पहला दिन—डर, excitement, उम्मीदें और अनजानी आवाज़ों से बना एक खास अनुभव है।
सुबह की घबराहट अलग ही होती है। आइने के सामने खड़े होकर खुद को motivating करना—
“सब ठीक होगा… बस थोड़ा confident रहना है।”
पर दिल है कि मानता ही नहीं। हाथ पसीने से भीगे हुए, दिमाग में हज़ारों सवाल—
कैसा होगा माहौल? लोग कैसे होंगे? कहीं गलती न हो जाए?
रास्ते भर मन में यही ख्याल घूमता रहता है। और फिर जैसे ही ऑफिस की बिल्डिंग दिखती है, दिल की धड़कन एक बार और तेज़ हो जाती है। पहला कदम अंदर रखते ही एक अजीब-सा mix feeling—नया होने का डर और शुरूआत का excitement—दोनों टकराकर दिल में हलचल पैदा करते हैं।
Reception पर पहला “Good Morning” सुनते ही थोड़ा हिम्मत आती है। Lift के अंदर खड़े लोग भी उसी journey का हिस्सा होते हैं—कुछ चेहरे friendly, कुछ busy, कुछ बिल्कुल expressionless… पर सब अपने-अपने काम में डूबे हुए।
आप बस सोचते हो—“कहीं मैं यहां फिट तो हो जाऊँगा?”
Desk पर बैठते ही वो नई कुर्सी और नया सिस्टम आपके साथी बन जाते हैं। पहली बार Team Introduction थोड़ा awkward लगता है—नए नाम, नई designation, और नए rules। पर फिर कोई एक सहकर्मी मुस्कुराकर कह देता है—
“Don’t worry, you’ll get used to it.”
बस वही मुस्कान पहले दिन की सबसे बड़ी राहत बन जाती है।
Lunch टाइम आते-आते माहौल थोड़ा हल्का हो जाता है। कोई अपने बारे में पूछता है, कोई मज़ाक करता है, कोई कहता है—
“First day is always tough.”
आप महसूस करते हैं कि ये लोग भी कभी इसी journey से गुज़रे हैं… और अब आप भी उस दुनिया का हिस्सा बन रहे हैं।
पूरे दिन में छोटी-छोटी चीज़ें यादगार बन जाती हैं—
पहली बार computer login करना,
पहली बार email भेजना,
पहली बार किसी task का ज़िम्मा मिलना,
और हाँ… पहली बार boss की नज़र में आने का डर भी!
शाम होते-होते थकान तो होती है, लेकिन एक अजीब-सी खुशी भी होती है—
आज मैंने एक नई शुरुआत की है। आज मैंने अपने career का पहला कदम उठाया है।
घर पहुँचकर जब जूते उतारते हैं, तो एहसास होता है कि—
पहला दिन कितना भी कठिन क्यों न हो…
यही दिन हमें मज़बूत बनाता है,
यही दिन हमें नई possibilities दिखाता है,
और यही दिन हमें बताता है कि—
“तुम कर सकते हो!”
पहला ऑफिस वाला दिन परफेक्ट नहीं होता।
पर यही imperfections इस दिन को ज़िंदगी की सबसे यादगार शुरुआत बना देते हैं।

