Person sitting near window in emotional reflective mood
Emotional Reflection – Feeling of Inner Tiredness

कभी-कभी मन भी थक जाता है

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🌿 कभी-कभी मन इतना थक जाता है…

कभी-कभी मन इतना थक जाता है कि शब्द भी साथ छोड़ देते हैं। चेहरे पर मुस्कान बनी रहती है, लेकिन भीतर कहीं एक हल्की-सी टीस लगातार धड़कती रहती है। हम बाहर से जितने मजबूत दिखते हैं, अंदर से उतने ही नाज़ुक होते हैं—बस दुनिया को दिखाना नहीं चाहते।

Life का सबसे मुश्किल हिस्सा यह नहीं कि कोई आपको छोड़ जाए, बल्कि यह है कि आप फिर भी normal behave करते रहें। भीड़ भरी दुनिया में चलते हुए भी एक खालीपन साथ चलता है, जैसे कोई गहराई में छुपा हुआ दर्द अपने आप ही सांस ले रहा हो।

कुछ रिश्ते समय के साथ दूर नहीं होते; वे बस दिल की गहराइयों में उतर जाते हैं। उनकी यादें एक अजीब-सी भावना देती हैं—दर्द भी और सुकून भी। यादें कभी-कभी ज़ख़्म भी बन जाती हैं, और कभी मरहम भी।

हम अक्सर अपनी सबसे कठिन लड़ाइयाँ चुप रहकर लड़ते हैं—
ना किसी से शिकायत,
ना कोई शोर,
सिर्फ़ एक शांत संघर्ष… जिसे कोई देख नहीं पाता।

लेकिन यही तो ज़िंदगी है—कभी थकान, कभी ताक़त; कभी दर्द, कभी healing; कभी अकेलापन, कभी अपनापन। और इन सबके बीच, हम धीरे-धीरे खुद को फिर से जोड़ना सीख लेते हैं।

किसी ने सही कहा है—
“जो दर्द हमें बदल देता है, वही हमें मजबूत भी बनाता है।”

आज अगर मन थका हुआ है, तो कोई बात नहीं…
कभी-कभी रुकना भी ज़रूरी होता है,
ताकि हम खुद को फिर से महसूस कर सकें।

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