कॉर्पोरेट दुनिया बाहर से जितनी चमकदार, प्रोफेशनल और व्यवस्थित दिखाई देती है,
अंदर से उतनी ही जटिल, उलझी हुई और अनकही कहानी से भरी होती है।
यहाँ हर मुस्कान वास्तविक नहीं होती, हर तारीफ़ सच्ची नहीं होती,
और हर हाथ मिलाना भरोसे का नहीं—कई बार बस एक औपचारिकता का हिस्सा होता है।
ऑफिस में अक्सर सब कुछ सामान्य दिखता है—
लोग काम में व्यस्त, मीटिंग्स चल रही हैं, रिपोर्ट्स बन रही हैं…
लेकिन इस सतह के नीचे कई परतें छिपी होती हैं—
परफॉर्मेंस का दबाव, पॉलिटिक्स का खेल, और नंबरों की रेस।
कई बार आप अपनी मेहनत से आगे बढ़ते हैं,
लेकिन किसी और की चालें आपके कदम रोक देती हैं।
कई बार आप उम्मीद करते हैं कि आपकी ईमानदारी, आपके काम की क्वालिटी दिखेगी…
लेकिन दिखाई देता है किसी और का प्रभाव, किसी और का नेटवर्क, या किसी और की चापलूसी।
कॉर्पोरेट पॉलिटिक्स का सबसे मुश्किल हिस्सा यह नहीं कि लोग खेल खेलते हैं—
बल्कि यह है कि आपको मुस्कुराकर उस खेल के बीच भी बने रहना पड़ता है।
यहाँ सीखना पड़ता है कि किस बात पर चुप रहना है,
किस पर प्रतिक्रिया नहीं देनी,
किस चेहरे को जानना ज़रूरी है,
और किस बात को दिल पर नहीं लेना है।
धीरे-धीरे समझ में आता है कि—
ऑफिस में जो दिखता है, वही सच नहीं होता।
कई साइलेंट बैटल्स, कई छुपी राजनीति, कई अनकही वार्तालाप…
सब काम की फाइलों और मुस्कानों के नीचे दबे रहते हैं।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात—
आपको खुद को खोना नहीं है।
काम आपका है, मेहनत आपकी है, और ईमानदारी भी आपकी पहचान है।
दुनिया चाहे जैसे चले,
आपका सफ़र आपके अपने दम पर ही आगे बढ़ेगा।
Corporate Politics आपके रास्ते में धुंध ला सकती है,
पर आपकी सच्चाई, आपकी स्किल और आपका धैर्य—
वही वो रोशनी है जो आपको आगे का रास्ता दिखाती है।

