Traditional illustration showing Chola, Chera, Pandya and Vijayanagara kings with South Indian temples and maritime scene in the background.

Episode 8 — South Indian Empires: चोल, चेरा, पांड्य और विजयनगर का शक्ति-काल

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चोल, चेरा, पांड्य और विजयनगर: भारत का दक्षिणी शक्ति-काल

दक्षिण भारत का इतिहास उत्तर भारत की तरह सीधे-सीधे राजवंशों की बदलती हुई रेखा नहीं है। यहाँ की कहानी गहरी, बहुपक्षीय और लंबे समय तक फैलने वाली है। चोल, चेरा, पांड्य और विजयनगर जैसे साम्राज्य केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं थे, बल्कि वे ऐसी ताकतें थीं जिनका प्रभाव पूरे भारतीय महासागर तक महसूस किया गया।

इन साम्राज्यों ने भारत को केवल शासित नहीं किया, बल्कि भारत के राजनीतिक, सांस्कृतिक और समुद्री चरित्र को परिभाषित किया।


Chera Empire — Tamilakam का समुद्री पुल

चेरा दक्षिण भारत का सबसे पुराना और महत्वपूर्ण राजवंशों में से एक था। यह वह समय था जब भारत अरब सागर से लेकर लाल सागर तक एक मजबूत व्यापार केंद्र के रूप में उभर रहा था।

चेरा शासन के दौर में काली मिर्च और मसालों का व्यापार पूरे विश्व में फैल चुका था। रोमन साम्राज्य के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध, केरल का प्राचीन बंदरगाह मुज़िरिस, और संगम साहित्य का उत्कर्ष—इन सबने चेरा साम्राज्य को पूर्व और पश्चिम को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पुल बना दिया।


Pandya Dynasty — Tamilakam की सबसे प्राचीन राजवंश परंपरा

पांड्य दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन और प्रलेखित साम्राज्यों में से एक रहा है। मदुरै उनका गौरवशाली केंद्र था, जो साहित्य, मंदिरों और व्यापार की संस्कृति में बेहद समृद्ध था।

मेणाक्षी मंदिर सभ्यता का उदय, रोमन और ग्रीक लेखकों द्वारा पांड्य राज्य का उल्लेख, मोती-मत्स्यन और समुद्री कुशलता—पांड्य साम्राज्य ने तमिल पहचान और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को गहरी नींव दी।


Chola Empire — दक्षिण एशिया का समुद्री महाशक्ति साम्राज्य

दक्षिण भारतीय इतिहास की चर्चा चोल साम्राज्य के बिना अधूरी है। चोल केवल राजा नहीं थे, बल्कि समुद्री सभ्यता के निर्माता थे।

राजराजा चोल और राजेन्द्र चोल उनके सबसे महान शासक माने जाते हैं। बृहदेश्वर मंदिर जैसे स्थापत्य चमत्कार, दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैली हुई नौसैनिक शक्ति, श्रीविजय साम्राज्य पर विजय, और स्थानीय प्रशासन का उन्नत ढांचा—इन सबने चोलों को दक्षिण एशिया की सबसे प्रभावशाली शक्ति बना दिया।

भारतीय महासागर को “Chola Lake” कहा जाने का कारण उनकी अपार समुद्री शक्ति ही थी।


Vijayanagara Empire — मध्यकालीन भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण

उत्तर भारत जहां बार-बार होने वाले आक्रमणों से अस्थिर था, वहीं दक्षिण में विजयनगर साम्राज्य एक नई रोशनी की तरह उभर रहा था।

1336 में हरिहर और बुक्का द्वारा स्थापित इस साम्राज्य की राजधानी हम्पी अपने स्थापत्य वैभव के कारण विश्व धरोहर में शामिल है। विजयनगर ने भक्ति आंदोलन को प्रोत्साहन दिया, मंदिर स्थापत्य का स्वर्णकाल पुनर्जीवित किया, और दक्षिण भारत में सांस्कृतिक और सैन्य शक्ति का नया रूप उभारा।

इतिहासकारों और पुर्तगाली यात्रियों ने विजयनगर को उस समय की दुनिया के सबसे समृद्ध शहरों में से एक बताया है।


दक्षिण भारतीय साम्राज्यों का समग्र प्रभाव

दक्षिण भारत ने भारत को समुद्री पहचान, वैश्विक व्यापार नेटवर्क, महान मंदिर स्थापत्य परंपरा, भक्ति आंदोलन का विस्तार, कलाओं और नृत्य शैलियों का विकास, और साहित्यिक स्वर्ण युग जैसी अनमोल धरोहरें दीं।

ये सभ्यताएँ भारत के प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास का एक बड़ा हिस्सा हैं, जिन्हें पाठ्यपुस्तकों में अक्सर कम स्थान मिला है। इस श्रृंखला का उद्देश्य उसी छूटे हुए इतिहास को सही रूप में प्रस्तुत करना है।

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